ससकत सहतय म सतरय क समजक यगदन
Published in Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research) • Sep 15, 2022
NobleIDNI2P11W22R77S76
Authors:
डॉ सत्येंद्र संगाप्पा राऊत
Abstract
शब्दार्थयो: सहितयोः भावः साहित्यम् इति तस्य विवक्षा स्पष्टं दृश्यते। भारतीय संस्कृति में दोनों की भावना के रूप में साहित्य की उनकी परिभाषा स्पष्ट रूप से देखी जाती है, प्राचीन जीवन का अभ्यास वास्तव में साहित्य के बिना असंभव प्रतीत होता है। वैदिक और धर्मनिरपेक्ष संस्कृतियों की पूर्णता दो आर्ष महाकाव्य...
Subject
Finding related papers...
Discussions
(0)No comments yet
Be the first to share your thoughts!