मन र ! जगत रहए भई (अलख जगत कबर क वण और उनक समजक चतन)
Published in Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research) • Oct 1, 2020
NobleIDNI5P65W99R61S79
Authors:
Ankita Shambhawi Verma
Abstract
कबीर एक ऐसे विचारक थे जिन्होंने अपने विचारों को समाज तक पहुंचाने के लिए निरंतर समाज से विद्रोह किया। उनकी वाणी जितनी स्वयं के लिए थी उतनी ही उस समाज के लिए भी, जो दिग्भ्रमित था, जिसमें तमाम तरह की धार्मिक विकृतियाँ आ गई थीं, जाति नस्लगत संकीर्णता, छुआछूत, मूर्तिपूजा, छाप – तिलक, बलि प्रथाएं, वेद – क...
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