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परमचनदज और व.स. खडकरज क उपनयस सहतय म वशय नर क सथत

Published in Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research) • Dec 31, 2024
NobleIDNI9P43W66R53S83
Authors:
प्रा.डॉ.जयश्री बाबासाहेब काशीद

Abstract

नारी यह एक समाज का महत्त्वपूर्ण अंग है | नारी की जरा सी भूल पर समाज उसे बहिष्कृत कर देता है | उसके पतिता होने में पुरुष का भी हाथ होता है, परंतु समाज पुरुष को पतित नहीं समझता | नारी अगर पतिता होती है तो उसे कलंकिनी कहा जाता है | परिवार के लोग उससे बात भी नहीं करते हैं | नारी का कलंकित रुप वेश्या का ...

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