आचरय महवर परसद दववद और उनक सहतयक ममस दषट
Published in Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research) • Sep 28, 2024
Authors:
रूपेश कुमार
Abstract
जब कभी साहित्य की अंतर्वस्तु मानवता के विरुद्ध सर उठाती है तो साहित्य में सहज ही नकारात्मक जीवन मूल्यों का आगमन प्रारंभ हो जाता है। इस अटल सत्य से द्विवेदी जी भली-भांति परिचित थे। यह भी कारण था कि वह सदैव साहित्य में ज्ञान के संचार पर बल देते थे। आचार्य ने सरस्वती के माध्यम से नवीन पाठकों, लेखकों की...
Finding related papers...
Discussions
(0)No comments yet
Be the first to share your thoughts!