वसधर बचओ
Published in Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research) • Aug 30, 2024
NobleIDNI4P11W90R13S43
Authors:
डॉ. पुष्पा गोविंद गायकवाड
Abstract
धरती माता की कोख में जो अमूल्य निधियाँ भरी है। जिनके कारण वह वसुंधरा कहलाती है। दिनरात बहनेवाली नदियोंने पहाडो को पीस पीसकर अगणित प्रकार की मिटियो से पृथ्वी की देह को सजाया। वृक्ष ही जल है जल ही रोटी है और रोटी ही जीवन है। यह नग्न सत्य है। आजसभी भारतीय ह्रदयो में असंतोष भरा है। क्योंकि हमारे पास खान...
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