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वरण-सनदरय दवर दरशक स सवद करत भरतय कल

Published in Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research) • Sep 11, 2017
NobleIDNI5P14W81R25S46
Authors:
डा ॅ. अर्चना रानी

Abstract

कला और सौन्दर्य-ये दा े शब्द कला जगत में एक ज ैसे होते हुए भी बह ुत विस्तृत ह ैं। स्थूल तैार पर हम कला आ ैर सा ैन्दर्य में का ेई अन्तर नहीं कर पाते। सा ैन्दर्य एक मानसिक अवस्था ह ै आ ैर वह देश-काल से मर्या दित है। इस सा ैन्दर्य रूपी व ृक्ष की दो शाखायें ह ैं-एक प्रकृति तथा दूसरी कला। कलागत सौन्दर्य ...

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