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मदल गरग क कहनय म समजक चतरण

Published in Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research) • Sep 30, 2023
NobleIDNI8P53W03R19S58
Authors:
डॉ.एम. नारायण रेड्डी

Abstract

मृदुला गर्ग ने भोगे हुए यथार्थ को अपने साहित्य में हू-ब-हू चित्रित करने का प्रयास किया है। उसके बाद धीरे-धीरे उनकी सोच का दायरा बढ़ता चला गया। अपने युगीन व्यक्ति और समाज की सहज झलक इनकी कहानियों में देखी जा सकती है। उन्होंने अपनी कहानियों में युग-जीवन को तथा युग जीवन के संदर्भ में व्यक्ति के जीवन को...

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