२१ व सद क हद कवय म चतरत हशए क समज
Published in Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research) • Jan 11, 2024
NobleIDNI7P69W52R08S58
Authors:
प्रा. कविता तुकाराम चानकने
Abstract
२१ वीं सदीं में भारत को सार्वभौमिक राष्ट्र बनाने के लिए हमें गरीबीं, भूख, युद्ध, सामाजिक - आर्थिक विषमता के प्रश्न पर गंभीरता से विचार करने की जरुरत है। प्राचीन काल से वर्तमान काल की कविताओं में समाज द्वारा प्रताड़ित, पूंजीपतियों द्वारा शोषित तथा भूमंडलीकरण से प्रभावित एक ऐसा जनसमुदाय जिसे हाशिए का ...
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