समकलन हनद गजल म अभवयकत आरथक शषण और आम आदम
Published in Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research) • Mar 2, 2025
NobleIDNI8P94W55R21S14
Authors:
परिहार, भुवनेष कुमार
Abstract
समकालीन हिन्दी ग़ज़लकारों ने आधुनिक अर्थ प्रधान युग में जीवन मूल्यों के निरन्तर ह्यास की स्थिति पर ग़ज़ल रचना की है। बाजारवाद के प्रभाव के कारण भौतिक सुखों के पीछे भागने वाला मनुष्य मानवतावाद एवं इंसानियत जैसे मानवीय मूल्यों को भूला चुका है। इन ग़ज़लकारों की ग़ज़लों में बदलते जीवन मूल्य एवं उनके पतन...
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