आधनक हद सहतय और समज
Published in Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research) • Oct 4, 2025
NobleIDNI2P17W22R20S16
Authors:
पद्मश्री चौगुले
Abstract
“साहित्य से समाज, समाज से साहित्य” ये दोनों एक-दूसरे से गहरे रूप से जुड़े हुए हैं। साहित्य न केवल समाज की परिस्थितियों को दर्शाता है, बल्कि उसमें परिवर्तन लाने की क्षमता भी रहती है।“मानव मन की छवि है साहित्य, मानव जीवन की कवि, कला, भाव ही साहित्य, मानव की आशा-आकांक्षा साहित्य, मानव का नित्य रूप साहि...
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