''रस कलष क उठए थ वह नगदर'' - एक जवनपरक अधययन
Published in Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research) • Sep 30, 2025
NobleIDNI2P14W80R03S78
Authors:
गौतम कुमार गुप्ता
Abstract
सार:- यह शोधपत्र सुप्रसिद्ध आलोचक एवं कवि डॉ. नगेंद्र की काव्य-दृष्टि और उनके साहित्यिक योगदान का संक्षिप्त विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इसमें उनके विचारों को भारतीय और पाश्चात्य साहित्यिक परंपराओं के तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य में देखा गया है। नगेंद्र ने हिन्दी, संस्कृत और अंग्रेजी साहित्य का गहन अध्ययन ...
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