वरतमन परपरकषय म यग स आतम-परवरतन दवर समजक परवरतन
Published in Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research) • Mar 3, 2025
Authors:
भावना कच्छवाहा
Abstract
वर्तमान भौतिकवादी युग में मनुष्य अपने मूल स्वरूप को भूल गया है, जिसके परिणामस्वरूप वह अशांत और दुखी है। योग इन दुखों से मुक्ति और परम शांति व आनंद प्राप्त करने का एकमात्र उपाय है। योग जीवन जीने की कला और एक साधना विज्ञान है जो जन्म-जन्मांतर के संस्कारों को क्षीण कर व्यक्ति को आत्म-साक्षात्कार और मोक...
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