अगन दवत क वसतत अधययन
Published in International Journal of Sanskrit Research • Jul 1, 2026
NobleIDNI4P545W908R813S231
Authors:
गौरव तिवारी
Abstract
वैदिक परम्परा में अग्नि का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं बहुआयामी है। ऋग्वेद का प्रारम्भ ही अग्नि की स्तुति से होता है, जहाँ उसे पुरोहित, ऋत्विज, होता तथा रत्नधातमम् आदि विशेषणों से विभूषित किया गया है। अग्नि केवल यज्ञ की ज्वाला न होकर देवताओं और मनुष्यों के मध्य संदेशवाहक, ऊर्जा एवं जीवन-शक्ति का प...
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