समकलन हद कथ-सहतय म वदध-वमरश और परवरक सरचन
Published in The Paradigm Chronicle Journal of Academic Inquiry and Critical Thought • Aug 16, 2026
NobleIDNI1P810W855R628S930
Authors:
डॉ. कृष्ण कुमार पाल
Abstract
समकालीन हिंदी कथा-साहित्य में वृद्ध-विमर्श, सामाजिक परिवर्तन, पारिवारिक विघटन और बदलते मानवीय संबंधों को समझने का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम है। भारतीय समाज में वृद्ध व्यक्ति लंबे समय तक परिवार के अनुभव, परंपरा, संस्कार और निर्णय-प्रक्रिया के केंद्र में रहा है किंतु नगरीकरण, औद्योगीकरण, वैश्वीकरण, उपभोक...
Finding related papers...
Discussions
(0)No comments yet
Be the first to share your thoughts!