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ससकत सहतय क नटक म परकत सदरय एव नर सततव चतरण (महकव कलदस क सदरभ म)

Published in International Journal of Arts Humanities and Social Studies • Jul 1, 2025
Authors:
धर्मेन्द्र राय

Abstract

संस्कृत साहित्य की कृतियाँ मानवीय संवेदना, प्रकृति और संस्कृति के परस्पर संबंध का सर्वाधिक कलात्मक रूप प्रस्तुत करती हैं। के. कृष्णमूर्ति ने कालिदास को प्रकृति, प्रेम और मानवता का सार्वभौम कवि मानते हुए उनकी काव्य-दृष्टि को भारतीय सांस्कृतिक चेतना का समर्थ रूप कहा है [1]। यह व्यापकता उनके नारी-पात्र...

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