श्री धनपत सिंह के लोक साहित्य में ‘भक्ति भावना
Published in The Anveshan: A Multidisciplinary Journal in Hindi • Jan 1, 2026
Authors:,
पिंकी
डॉ. विकास कुमार
Abstract
धनपत सिंह की भक्ति भावना एकांगी नहीं है। उन्होंने ईश्वर को लोक-मंगलकारी रूप में प्रस्तुत किया है। उनके साहित्य में भक्ति केवल व्यक्तिगत मोक्ष का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध एक नैतिक अस्त्र है। उन्होंने गुरु-वंदना, आत्म-बोध और परोपकार को भक्ति के अनिवार्य अंग के रूप में स्थापित किया...
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